नए साल के दिन क्यों चल 'हिन्दू नवर्ष ' ट्रेंड क्यों बायकॉट हो रहा है न्यू ईयर

             New year के दिन क्यों चल रहा है 'हिन्दू नव वर्ष ' trend 

क्या ये 1 जनवरी को new year को मनाने से हो रही है परेशानी 

कुछ लोगों के x पर ट्वीट जो 1 जनवरी के 

New year को विरोध कर रहे है 

प्रशासक समिति®✊🚩(Reg. E&SWS)

@OfficialTeamPs

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6m

मानसिक गुलामी की जंजीरों को तोड़ अपनी संस्कृति और सभ्यता के संरक्षण हेतु हिंदुओं जागो और अंग्रेजी नववर्ष को छोड़ अपने प्राकृतिक हिंदू नववर्ष को पहचानो।


अंग्रेजी नववर्ष (मिशनरी एजेंडा) के भयानक दलदल में हमारा युवा फंसकर बर्बाद होता जा रहा है।

Hindu Nav Varsh


इसी तरह कुछ और यूजर लिखते है

ᴜᴍᴀ ᴋɪʀᴀɴ
@Umakiran71
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15m
Sant Shri Asharamji Bapu जी ने सनातन संस्कृति की महत्ता को जन जन तक पहुंचाया। उनका कहना है Hindu Nav Varsh तो चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से ही शुरू होता हैं। मानसिक गुलामी छोड़ो अपनी सनातन संस्कृति को अपनाओ हम ऋषियों की संतान हैं। इसीलिए तो सनातन संस्कृति महान हैं।
हमें हिन्दू नववर्ष का सम्मान करना चाहिए लेकिन इसके कारण क्या पूरे विश्व में मनाया जाने वाला नववर्ष का विरोध करना चाहिए

इसी तरह कुछ और यूजर लिखते हैं 
Daku Z6
@Z6Daku
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9m
Sant Shri Asharamji Bapu बताते हैं हमें अपनी संस्कृति पर गर्व होनी चाहिए। हम सनातनी भाईयों को Hindu Nav Varsh मनाना चाहिए जो कि चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से शुरू होता है न की न्यू ईयर 1जनवरी को,खुद का विवेक जगाएं भटकने की जरूरत 

लेकिन क्या न्यू ईयर मानने वाले हिंदू मानसिक पागल है तो इसका जवाब है नहीं जिसको जो इच्छा है वह वो मनाए अगर विश्व मे यह मनाया जाता है तो इंडिया में मानने में कोई बड़ी बात नहीं है

नव वर्ष या नया साल एक उत्सव की तरह पूरे विश्व में अलग-अलग स्थानों पर अलग-अलग तिथियों तथा विधियों से मनाया जाता है[1]। विभिन्न सम्प्रदायों के नव वर्ष समारोह भिन्न-भिन्न होते हैं और इसके महत्त्व की भी विभिन्न संस्कृतियों में परस्पर भिन्नता है।
 वर्ष उत्सव ४,००० वर्ष पहले से बेबीलोन में मनाया जाता था। लेकिन उस समय नए वर्ष का ये त्यौहार 21 मार्च को मनाया जाता था जो कि वसंत के आगमन की तिथि भी मानी जाती थी। प्राचीन रोम में भी नव वर्षोत्सव के लिए चुनी गई थी। रोम के शासक जूलियस सीजर ने ईसा पूर्व ४५वें वर्ष में जब जूलियन कैलेंडर की स्थापना की, उस समय विश्व में पहली बार १ जनवरी को नए वर्ष का उत्सव मनाया गया। ऐसा करने के लिए जूलियस सीजर को पिछला वर्ष, यानि, ईसापूर्व ४६ इस्वी को ४४५ दिनों का करना पड़ा था। [2]

हिन्दुओं का नव वर्ष चैत्र नव रात्रि के प्रथम दिन अर्थात् वर्ष प्रतिपदा एवं गुड़ी पड़वा पर प्रत्येक वर्ष विक्रम संवत के अनुसार चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से आरम्भ होता है।हिंदू कैलेंडर के 12 माह- चैत्र, वैशाख, ज्येष्ठ आषाढ़, श्रावण, भाद्रपद आश्विन, कार्तिक, मार्गशीर्ष पौष, माघ और फाल्गुन हैं। [3] 
  
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Andhatu। Aur unke यौगिक 





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